Kapoor Sir's Notes
घर जाने की उसने विदा ली। सबसे ‘टाटा-टाटा, बाय-बाय’ कर ली। अब वह उड़ने को हुई, बेचारी उलझकर रह गई। “अरे! मैं फँस गई!” वह चिल्लाई। नीलू ने उसकी पुकार सुनी। दूसरी चिड़ियों ने भी बात सुनी। बहेलिया ठगा-सा रह गया। सोच रहा था, ‘पंछियों ने यह किया?’ क्या करता वह बेचारा? एकता के आगे था हारा। चिड़े-चिड़ियाँ तनिक न सकुचे। सीधे दादी माँ के घर पहुँचे। चिंतित दादी बैठी मुँह लटकाए। बुरे विचार मन में आए। चिंकी की आँखों में आँसू थे। उदास हो रहे चुसकू-मुसकू थे। दादी माँ का चरखा शांत। सबका मन हो रहा क्लांत।